आरती क्या है, कब और क्यों की जाती है?
सनातन धर्म में किसी भी पूजा, व्रत, अनुष्ठान या संध्या वंदन का चरमोत्कर्ष सदैव आरती (Aarti) के साथ ही पूर्ण होता है। दीपक की पावन ज्योति, कर्पूर की सुगंध, शंख और घंटों के नाद के साथ जब भक्त अपने आराध्य के सम्मुख थाल घुमाता है, तो वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और गहन शांति का संचार हो जाता है।
आरती क्या है?
संस्कृत में आरती को ‘आरात्रिक’ या ‘नीराजन’ कहा गया है। इसका मूल अर्थ है अज्ञान रूपी रात्रि (अंधकार) को दूर कर ज्ञान के दिव्य प्रकाश का प्राकट्य करना। जब भक्त अपने समस्त सांसारिक अहंकार को त्यागकर ‘आर्त भाव’ (दीन, निष्कपट और अनन्य प्रेम) से परमात्मा की वंदना करता है, तो वह पावन क्रिया आरती कहलाती है।
आरती क्यों की जाती है?
शास्त्रों के अनुसार, आरती षोडशोपचार पूजा का 15वां व अत्यंत अनिवार्य अंग है। पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई मंत्रहीनता, क्रियाहीनता या भाव की भूल-चूक की क्षमा याचना आरती के माध्यम से ही पूर्ण होती है। इसके अलावा, आरती साधक के भीतर और आसपास के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा का नाश कर सकारात्मकता व आत्म-शुद्धि का संचार करती है।
📌 आरती तत्व-दर्शन व त्वरित तथ्य (Fact Sheet)
- मूल संस्कृत शब्द: ‘आरात्रिक’ (अंधकार नाशक) एवं ‘नीराजन’ (विशेष तेज से दिव्य अंगों का दर्शन)
- पूजा क्रम: षोडशोपचार पूजा का 15वां व अनिवार्य अंग (त्रुटि क्षमापना)
- पंचतत्व समर्पण: पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और पंचप्राणों का परमात्मा में विलय
- थाल घुमाने का शास्त्रीय नियम: कुल 14 बार — 4 बार चरणों में, 2 बार नाभि पर, 1 बार मुख पर, और 7 बार सर्वांग पर
- आरती का मुख्य उद्देश्य: पूजा की त्रुटियों की भरपाई, अहंकार का विसर्जन व सर्वतोमुखी मंगल
🕉️ आरती कितने प्रकार की होती है? (Aarti Categories)
सनातन परंपरा में आरती को मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर समझा और वर्गीकृत किया जाता है: समय (प्रहर/मंदिर सेवा) के आधार पर और आराध्य/भाव (विषय) के आधार पर।
1. समय और सेवा पद्धति के आधार पर (मंदिरों की पारंपरिक आरतियां)
प्रमुख धामों (जैसे श्री बांके बिहारी, काशी विश्वनाथ, महाकाल, तिरुपति बालाजी आदि) में दिनभर की सेवा के अनुसार आरती सामान्यतः 5 से 7 प्रकार की होती है:
- मंगला आरती: यह प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) में भगवान को निद्रा से जगाने और दिन की पहली पूजा के रूप में की जाती है।
- शृंगार / धूप आरती: भगवान के पावन स्नान और नूतन वस्त्र-आभूषण से भव्य शृंगार के उपरांत की जाती है।
- भोग / राजभोग आरती: दोपहर के समय प्रभु को मुख्य नैवेद्य (राजभोग) अर्पित करते समय की जाती है।
- संध्या आरती: सूर्यास्त के समय, गोधूलि वेला में दीपक प्रज्वलित कर की जाने वाली नित्य आरती।
- शयन आरती: रात्रि में विश्राम से पूर्व प्रभु को शयन कराने हेतु की जाने वाली दिन की अंतिम आरती।
2. आराध्य और विषय के आधार पर (आरती संग्रह श्रेणियां)
घरों, नित्य पूजा-पाठ और भक्ति साहित्य में आरतियों को आराध्य और स्वरूप के आधार पर 8 प्रमुख श्रेणियों में बांटा जाता है:
💡 क्या इसके अलावा भी कोई और प्रकार होता है? (साधनों के आधार पर भेद)
शास्त्रीय पूजा विधान के अनुसार आरती करने के साधनों (तत्वों) के आधार पर भी दो विशेष भेद माने जाते हैं:
- पंचप्रदीप आरती: पांच मुखों वाले विशेष दीपक से की जाने वाली आरती, जो पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और पंचप्राणों के परमात्मा में समर्पण का प्रतीक है।
- कर्पूर आरती (नीराजन): शुद्ध भीमसेनी कपूर जलाकर की जाने वाली आरती। कपूर जलने के बाद कोई अवशेष (राख) नहीं छोड़ता, जो यह सिखाता है कि साधक का अहंकार भी ईश्वर के सम्मुख पूर्णतः भस्म हो जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त कोई अन्य औपचारिक या शास्त्रीय श्रेणी नहीं होती; समस्त आरतियाँ इन्हीं श्रेणियों और प्रहरों के अंतर्गत समाहित हो जाती हैं।
3. 🙏 भगवान की प्रसिद्ध आरतियां (Prasidh Bhagwan Ki Aartiyan)
सनातन परंपरा में प्रमुख देवी-देवताओं के नित्य व विशेष पूजन हेतु गाई जाने वाली सिद्ध आरतियाँ:
- भगवान श्री गणेश जी की आरती – अर्थ सहित — जय गणेश, जय गणेश देवा (प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता)।
- सुखकर्ता दुखहर्ता मराठी आरती — श्री गणेश जी की प्रसिद्ध मराठी आरती, मूल पाठ व सरल भावार्थ।
- शेंदुर लाल चढ़ायो — गणेश जी की प्रसिद्ध आरती/स्तुति का संपूर्ण पाठ, शब्दार्थ व भावार्थ।
- सिद्धिविनायक आरती — श्री सिद्धिविनायक की आरती व उससे जुड़ी भक्ति परंपरा।
- श्री झूलेलाल जी की आरती (ॐ जय दूलह देवा) — वरुणावतार भगवान झूलेलाल जी की पावन आरती।
- भगवान शिव की आरती (ॐ जय शिव ओंकारा) — हर पंक्ति का सरल हिंदी अर्थ व कल्याणकारी रहस्य।
- शिव तांडव आरती (ॐ जय गंगाधर जय गिरिजाधीशा) — विशेष साधना व दुर्लभ शिव तांडव आरती।
- विष्णु भगवान की आरती (ॐ जय जगदीश हरे) — श्री हरि विष्णु की सार्वभौमिक आरती व संपूर्ण दर्शन।
- ॐ जय जगदीश हरे: दार्शनिक रहस्य व सही विधि — पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी रचित आरती का तत्व दर्शन।
- श्री कृष्ण जी की आरती — आरती कुंजबिहारी की — बांके बिहारी व ब्रजमंडल की पावन युगल छवि आरती।
- श्री केवड़ेश्वर महादेव स्तुति — इंदौर (मालवा) के सिद्ध धाम की पावन आरती व स्तुति।
- श्री हनुमान जी की आरती (आरती कीजै हनुमान लला की) — स्वामी रामानंद जी द्वारा रचित संकटमोचन आरती।
- श्री शनिदेव जी की आरती (भक्तन हितकारी) — कर्मफलदाता शनिदेव के ग्रह-दोष निवारण पाठ।
- श्री सूर्य देव की आरती: “जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन…” — प्रत्यक्ष देव भुवन भास्कर की आरोग्यदायी आरती।
- श्री राम जी की आरती: “आरती कीजै श्री रघुवर जी की…” — मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की आरती।
- श्री खाटू श्याम जी की आरती (शीश के दानी) — कलयुग अवतारी बाबा श्याम की कृपादायी आरती।
- श्री सत्यनारायण जी की आरती (जय लक्ष्मी रमणा) — पूर्णिमा व्रत कथा व पारिवारिक अनुष्ठान आरती।
- श्री कुबेर देव की आरती (ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे) — धन के अधिपति कुबेर देव की संपूर्ण आरती व नियम।
4. 🌺 देवी-देवियों की प्रसिद्ध आरतियां (Devi Mata Ki Aartiyan)
आदिशक्ति भगवती के विभिन्न स्वरूपों की पावन आरतियाँ:
- माता लक्ष्मी की आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता) — शुक्रवार व दीपावली पूजन हेतु संपूर्ण शब्दार्थ सहित।
- दुर्गा माता की आरती (जय अम्बे गौरी) — नवरात्रि व नित्य देवी पूजन की मंगलमयी आरती।
- माँ शैलपुत्री की आरती — नवरात्रि के प्रथम दिन की आरती, पूजन विधि व सरल अर्थ।
- माँ ब्रह्मचारिणी की आरती — द्वितीय नवरात्र की आरती, तप रहस्य व भावार्थ।
- माँ चंद्रघंटा की आरती — तृतीय नवरात्र की आरती, निर्भयता का रहस्य व अर्थ।
- माँ कूष्माण्डा की आरती — चतुर्थ नवरात्र की आरती, ब्रह्मांड रचना व भावार्थ।
- माँ स्कंदमाता की आरती — पंचम नवरात्र की आरती, वात्सल्य व मोक्ष का भाव।
- काली माता की आरती (अम्बे तू है जगदम्बे काली) — संकट निवारण व नकारात्मक शक्तियों के नाश हेतु आरती।
- सरस्वती माता की आरती (जय सरस्वती माता) — विद्या, वाणी, बुद्धि व संगीत सिद्धि की वंदना।
- संतोषी माता की आरती (जय संतोषी माता) — शुक्रवार व्रत, गुड़-चना भोग व सही आरती विधि।
- गायत्री माँ की आरती (जयति जय गायत्री माता) — सद्ज्ञान, प्रकाश व वेदों की जननी की पावन आरती।
- ललिता माता की आरती (श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी) — श्रीविद्या त्रिपुरसुंदरी की कल्याणकारी आरती।
- एकादशी माता की आरती (ॐ जय एकादशी माता) — 24 एकादशियों का पौराणिक रहस्य व संपूर्ण आरती।
- पार्वती माता की आरती: “जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता…” — अखंड सौभाग्य व वैवाहिक सुख की आरती।
5. 📿 व्रत एवं पर्व की आरतियां (Vrat evam Parv Ki Aarti)
सनातन धर्म के प्रमुख व्रतों और त्योहारों के अवसर पर की जाने वाली विशेष आरतियाँ:
- एकादशी व्रत पारण आरती — साल की सभी 24 एकादशियों के व्रत पूजन में अनिवार्य आरती।
- गोवर्धन पूजा व अन्नकूट आरती — दीपोत्सव के अगले दिन की विशेष पूजा व आरती।
- सत्यनारायण व्रत कथा आरती — पूर्णिमा एवं संक्रांति व्रत कथा के समापन पर आरती।
- शुक्रवार संतोषी माता व्रत आरती — 16 शुक्रवार व्रत संकल्प व पारण की विशेष आरती।
- करवाचौथ व हरतालिका तीज आरती: अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु हेतु चौथ माता व मां पार्वती की आरती।
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आरती: भाद्रपद अष्टमी की मध्यरात्रि में आरती कुंजबिहारी की।
- महाशिवरात्रि आरती: चारों प्रहर की पूजा में ॐ जय शिव ओंकारा एवं शिव तांडव आरती।
- दीपावली महालक्ष्मी व कुबेर पूजा: कार्तिक अमावस्या पर ॐ जय लक्ष्मी माता एवं श्री कुबेर आरती।
6. 👳 गुरु की आरतियां (Guru Aarti Sangrah)
अज्ञान के अंधकार को मिटाकर जीवन में ज्ञान का प्रकाश भरने वाले पूज्य सद्गुरु की पावन आरतियाँ:
- ॐ जय गुरुदेव आरती: “जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञान स्वरूप सकल घट वासी…” — सार्वभौमिक गुरु वंदना।
- सद्गुरु की आरती: अपने दीक्षा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करने वाली आरती।
- गुरु पूर्णिमा विशेष आरती: आषाढ़ पूर्णिमा (महर्षि वेदव्यास जयंती) पर गुरु-चरणों के पूजन में की जाने वाली आरती।
7. 🙏 संत एवं महापुरुषों की आरतियां (Sant Mahapurush Aarti)
जन-कल्याण और भक्ति मार्ग प्रशस्त करने वाले सिद्ध संतों की पावन आरतियाँ:
- श्री साईं बाबा की आरती: शिरडी परंपरा की काकड़ आरती, धूप आरती व शेज आरती।
- संत कबीर दास जी की आरती: कबीर पंथ में गाई जाने वाली सात्विक दीपक आरती।
- संत रविदास जी की आरती: समरसता और प्रभु भक्ति के प्रतीक संत शिरोमणि रविदास जी की वंदना।
8. 🌊 नदियों और पवित्र तत्वों की आरतियाँ (River & Nature Aartis)
प्रकृति और जीवनदायिनी पावन नदियों के पूजन में गाई जाने वाली पवित्र आरतियां:
- श्री गंगा मैया की आरती (ॐ जय गंगे माता) — हरिद्वार व काशी घाटों की यम-त्रास मिटाने वाली पावन स्तुति।
- तुलसी जी की आरती (जय जय तुलसी माता) — घर-आंगन में संध्या दीपदान के समय संपूर्ण पूजन महत्व।
- यमुना जी की आरती: “जय जय श्री यमुने, जय जय श्री यमुने…” — विश्राम घाट, मथुरा की पावन आरती।
- मां नर्मदा आरती: ओंकारेश्वर और भेड़ाघाट में गाई जाने वाली “ॐ जय नर्मदे माता”।
9. 🛕 धाम एवं तीर्थों की आरतियां (Dham & Temple Aartis)
भारत के सिद्ध तीर्थ स्थलों, पीठों और मंदिरों की सदियों पुरानी मंगलमयी आरती परंपरा:
- सालासर बालाजी आरती व मोहनदास इतिहास — राजस्थान के सिद्ध धाम की परंपरा व सही आरती विधि।
- श्री खाटू श्याम धाम आरती (सीकर, राजस्थान) — हारे के सहारे बाबा श्याम की संध्या व शृंगार आरती।
- बांके बिहारी मंदिर आरती (वृंदावन धाम) — ठाकुर जी की पर्दा सेवा के साथ होने वाली दिव्य आरती।
- काशी विश्वनाथ मंगला आरती: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रधान बाबा विश्वनाथ की भस्म व डमरू आरती।
- तिरुपति बालाजी सुप्रभातम व आरती: भगवान वेंकटेश्वर की प्रातःकालीन दिव्य वंदना।
10. 🪔 आरती करने की शास्त्रीय विधि व नियम (Step-by-Step Guide)
चरणबद्ध आरती नियम:
- आरती से पूर्व तैयारी: पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें, देवी-देवता का ध्यान, तिलक, पुष्प व नैवेद्य अर्पित करें।
- दीपक प्रज्वलित करना: शुद्ध तांबे या पीतल की थाल में कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। गाय के शुद्ध घी अथवा भीमसेनी कपूर का दीपक जलाएं।
- थाल घुमाने का क्रम (कुल 14 बार):
- भगवान के श्रीचरणों में 4 बार घुमाएं।
- नाभि कमल के सम्मुख 2 बार घुमाएं।
- मुखमंडल के सामने 1 बार घुमाएं।
- अंत में पूरे विग्रह के चारों ओर ‘ॐ’ की आकृति में 7 बार घुमाएं।
- शंखनाद व घंटी: आरती के समय बाएं हाथ से लगातार लयबद्ध घंटी बजाएं और अंत में 3 बार शंखनाद करें।
- शांतिकरण: आरती के उपरांत शंख या आचमनी से थाल के चारों ओर 3 बार जल छिड़कें।
- आरती ग्रहण करना: दोनों हाथों को ज्योति के ऊपर रखकर अपनी आंखों और मस्तक से लगाएं।
11. 🕯️ आरती में दीपक का महत्व (पंचप्रदीप व कपूर)
दीपक केवल प्रकाश का माध्यम नहीं, बल्कि साधक के अंतःकरण का प्रतीक है:
- घी बनाम तेल: सात्विक ऊर्जा और देवताओं के आह्वान के लिए गाय के शुद्ध घी का दीपक सर्वश्रेष्ठ है। शनिदेव, भैरव जी या संकट निवारण हेतु तिल या सरसों के तेल का विधान है।
- बत्तियों की संख्या: सामान्य नित्य पूजा में 1 बत्ती (एकमुखी) और विशेष आरती में 5 बत्तियां (पंचप्रदीप) जलाई जाती हैं, जो पांचों तत्वों के समर्पण की प्रतीक हैं।
- कर्पूर आरती (Camphor): कपूर जलने के बाद कोई राख या अवशेष नहीं छोड़ता। यह सिखाता है कि साधक का अहंकार भी ईश्वर के सम्मुख पूरी तरह भस्म हो जाना चाहिए।
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12. ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या आरती केवल भगवान की ही होती है?
नहीं, सनातन परंपरा में ईश्वर के अतिरिक्त देवी शक्तियों, एकादशी जैसे व्रतों, सद्गुरु, सिद्ध संतों, गौ माता, तुलसी और गंगा जैसी पावन नदियों की भी आरती का पूर्ण शास्त्रीय विधान है।
2. सुबह और शाम की आरती में क्या अंतर है?
सुबह की आरती (मंगला/शृंगार आरती) भगवान को जगाने, नवीन ऊर्जा का संचार करने और दिन को मंगलमय बनाने के लिए की जाती है। शाम की आरती (संध्या/शयन आरती) दिनभर की कृपा के लिए धन्यवाद देने और मानसिक शांति हेतु की जाती है।
3. क्या बिना आरती के पूजा पूरी मानी जाती है?
शास्त्रों के अनुसार आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजा के दौरान मंत्रों या विधि में जाने-अनजाने हुई त्रुटियों की भरपाई आरती के माध्यम से ही संभव होती है।
4. क्या एक ही दिन में कई आरतियाँ की जा सकती हैं?
जी हां, दैनिक पूजा में पहले प्रथम पूज्य गणेश जी की आरती की जाती है, उसके बाद कुलदेवता/इष्टदेवता (जैसे शिव, कृष्ण या राम) और अंत में महालक्ष्मी या हनुमान जी की आरती की जा सकती है।
5. क्या आरती पढ़ना जरूरी है या केवल सुनना भी फलदायी है?
आरती का प्रत्यक्ष गायन करना सर्वोत्तम है, परंतु यदि कोई असमर्थ है तो एकाग्रचित्त होकर आरती का श्रवण और दर्शन करने से भी समान पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
6. अलग-अलग पुस्तकों में आरती के शब्दों में अंतर क्यों मिलता है?
सैकड़ों वर्षों तक आरतियां मौखिक व लोक परंपरा में गाई जाती रहीं। क्षेत्रीय बोलियों (अवधी, ब्रज, मैथिली) के प्रभाव से कुछ शब्दों में थोड़ा अंतर आ जाता है, परंतु मूल भाव और फल सदा एक समान रहता है।
🙏 13. आरती से जुड़ी एक जरूरी बात (संपादकीय दृष्टिकोण)
अलग-अलग क्षेत्रों, प्राचीन पांडुलिपियों और विभिन्न संप्रदायों में एक ही आरती के कुछ पदों में मामूली शाब्दिक अंतर हो सकता है। सनातन धर्म में शब्दों के व्याकरण से कहीं अधिक महत्व भक्त के ‘भाव’ और ‘समर्पण’ का है। इसलिए किसी एक पाठ को ही एकमात्र सही मानने के बजाय अपने कुल और गुरु परंपरा के अनुसार श्रद्धापूर्वक आरती करना ही श्रेष्ठ है।
🚩 अपनी पसंदीदा आरती खोजें व भक्ति का प्रसार करें!
जिस आरती की आपको तलाश है, उसका नाम नीचे कमेंट में लिखें। यदि आपको यह संपूर्ण आरती संग्रह (Aarti Sangrah) उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ WhatsApp व सोशल मीडिया पर अवश्य साझा करें!
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई आरतियां, पौराणिक संदर्भ, इतिहास और पूजा विधियां सनातन धर्मग्रंथों (स्कंद पुराण, पद्म पुराण, ऋग्वेद) और प्रामाणिक संत परंपराओं के आधार पर संकलित की गई हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य सनातन ज्ञान और भक्ति रस को जन-जन तक पहुंचाना है।


