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शिव आरती का सरल हिंदी अर्थ: जानिए हर पंक्ति का असली राज

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: हे ओंकार स्वरूप भगवान शिव, आपकी जय हो। आप ही ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के रूप में संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं और अपने अर्द्धनारीश्वर रूप में माता पार्वती को धारण किए हुए हैं।


एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: आप ब्रह्मा के रूप में एकानन, भगवान विष्णु के रूप में चतुरानन और शिव रूप में पंचमुखी सुशोभित हैं। हंस (ब्रह्मा का वाहन), गरुड़ (विष्णु का वाहन) और नंदी बैल (शिव का वाहन)—तीनों रूपों में आप ही विराजमान हैं।


दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: आपके दो हाथ, चार हाथ और दस भुजाओं वाले स्वरूप अत्यंत शोभायमान हैं। आपके इन तीनों दिव्य रूपों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को देखकर तीनों लोकों के प्राणी मुग्ध हो जाते हैं।


अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: आप रुद्राक्ष की माला (ब्रह्मा रूप), वैजयंती वनमाला (विष्णु रूप) और मुंडों की माला (शिव रूप) धारण करते हैं। आप ही त्रिपुरासुर का वध करने वाले त्रिपुरारी और कंस का वध करने वाले कंसारी (श्रीकृष्ण/विष्णु) हैं।


श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: आपके अंगों पर श्वेत वस्त्र (ब्रह्मा), पीले वस्त्र (विष्णु) और बाघ की छाल (शिव) सुशोभित हैं। आपके साथ सनक-सनंदन जैसे ऋषिगण, गरुड़ आदि देवदूत और भूत-गण हमेशा रहते हैं।


कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धरता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहर्ता॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: आपके हाथों में कमंडल (सृष्टि निर्माण), चक्र (जगत पालन) और त्रिशूल (संहार) विराजमान हैं। आप ही इस संसार को बनाने वाले (कर्ता), पालने वाले (भर्ता) और अंत में संहार करने वाले (संहर्ता) हैं।


ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: जो लोग अज्ञानी हैं, वे ब्रह्मा, विष्णु और शिव को अलग-अलग मानते हैं। वास्तव में ये तीनों ओंकार (ॐ) रूपी एक ही परम तत्व के स्वरूप हैं।


काशी में विश्वनाथ विराजे नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: काशी में आप स्वयं बाबा विश्वनाथ के रूप में विराजमान हैं और आपके प्रिय वाहन नंदी आपकी सेवा में रहते हैं। जहाँ प्रतिदिन आपको नित्य भोग लगाया जाता है, आपकी महिमा अपरंपार है।


त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव…॥

अर्थ: जो भी भक्त तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) के स्वामी भगवान शिव की यह आरती सच्चे भाव से गाता है, स्वामी शिवानंद कहते हैं कि वह अपनी सभी मनोकामनाओं का फल प्राप्त करता है।

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