Aarti Kya Hai? आरती क्यों करते हैं? जानिए इसका वैदिक इतिहास, वैज्ञानिक रहस्य और 14 बार थाल घुमाने के नियम
आरती क्या है, कब और क्यों की जाती है? सनातन धर्म में किसी भी पूजा, व्रत, अनुष्ठान या संध्या वंदन
आरती क्या है, कब और क्यों की जाती है? सनातन धर्म में किसी भी पूजा, व्रत, अनुष्ठान या संध्या वंदन
सनातन धर्म में सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ ‘एकादशी व्रत’ के समापन और पूजन के लिए “ॐ जय एकादशी माता” (Ekadashi
सनातन धर्म में धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां महालक्ष्मी की आराधना के लिए “ॐ जय लक्ष्मी
संकटमोचन महाबली श्री हनुमान जी की स्तुति के लिए “आरती कीजै हनुमान लला की” (Aarti Kije Hanuman Lala Ki) सबसे
सनातन परंपरा में “आरती कुंजबिहारी की” (Aarti Kunj Bihari Ki) भगवान श्री कृष्ण के मनमोहक स्वरूप की सर्वाधिक गाई जाने
॥ श्री खाटू श्याम जी की आरती: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ कलयुग के प्रत्यक्ष देव और ‘हारे का
॥ श्री शनिदेव जी की आरती: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ भगवान शनिदेव को नवग्रहों में न्यायधीश और कर्मफल
॥ झूलेलाल जी की आरती ॥ ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा। पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी
सनातन धर्म में प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी की नित्य उपासना जीवन के सभी विघ्नों और संकटों को
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…॥ अर्थ: हे ओंकार स्वरूप