तीज व्रत पूजन थाल सुहाग सामग्री और जलता हुआ पावन दीपक

तीज माता की आरती (Teej Mata Ki Aarti): हरियाली व हरतालिका तीज स्पेशल | माँ पार्वती आरती (ब्रह्म सनातन देवी)

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Table of Contents

॥ तीज माता की आरती (Teej Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi) ॥

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता…॥
अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता॥
जय पार्वती माता…॥
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥
जय पार्वती माता…॥
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥
जय पार्वती माता…॥

शुम्भ-निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।
सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥
जय पार्वती माता…॥

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥
जय पार्वती माता…॥

देवन अरज करत हम चित को लाता।
गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥
जय पार्वती माता…॥

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥

📌 तीज माता (माँ पार्वती): परिचय एवं जरूरी बातें

  • दिव्य स्वरूप: अखंड सौभाग्य (Marital Bliss), शक्ति, वात्सल्य और दांपत्य प्रेम की अधिष्ठात्री देवी।
  • अन्य नाम: उमा, गौरी, गिरिजा, अपर्णा, सती और आद्या शक्ति जगदम्बा।
  • प्रिय रंग एवं वस्त्र: हरा (हरियाली तीज हेतु) और लाल/पीला सुहाग वस्त्र।
  • प्रिय पुष्प व श्रृंगार: लाल गुड़हल, कमल, सोलह श्रृंगार की सामग्री और सिंदूर।
  • प्रिय भोग (Prasad): घेवर, मालपुआ, मखाने की खीर और ताजे फल।
  • सर्वोत्तम समय: प्रदोष काल (संध्या समय) और तीज व्रत के रात्रि जागरण में।
  • मुख्य आशीर्वाद: अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और परिवार में सुख-शांति।

🕉️ तीज व्रत ध्यान श्लोक एवं अखंड सौभाग्य मंत्र

“हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्॥”

सरल विधि: तीज की पूजा व आरती से पूर्व शांत मन से इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करें। यह दांपत्य जीवन में मधुरता और मानसिक शांति प्रदान करता है।

तीज व्रत में माँ पार्वती की आरती का महत्व और गहरा रहस्य

हरियाली तीज और हरतालिका तीज का पावन पर्व माँ पार्वती के कठोर तप और महादेव के साथ उनके पुनर्मिलन की याद दिलाता है। माता ने 107 जन्मों तक अखंड तप किया और 108वें जन्म में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। तीज की पूजा में गाई जाने वाली यह आरती उसी अटूट निष्ठा, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

दीपक की पवित्र लौ से आरती करने की परंपरा मन और घर के वातावरण की नकारात्मक तरंगों को दूर करती है। यदि आप समझना चाहते हैं कि सनातन परंपरा में आरती क्यों की जाती है, तो हमारा विशेष लेख आरती क्या है? जानिए इसका वैदिक इतिहास और थाल घुमाने के नियम अवश्य पढ़ें।

तीज माता की आरती: हर पद का आसान शब्दार्थ और सरल भावार्थ

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: ब्रह्म सनातन देवी (सृष्टि के आरंभ से सदा विद्यमान रहने वाली नित्य ईश्वरीय शक्ति / Eternal Divine Power), शुभ फल की दाता (सच्चे मन से की गई प्रार्थना पर सदैव मंगलकारी परिणाम देने वाली)।

सरल भावार्थ: हे माँ पार्वती, हे तीज माता! आपकी सदा ही जय हो। आप अनादि काल से इस संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त ब्रह्म शक्ति का ही प्रत्यक्ष स्वरूप हैं। जो भी व्रती महिला या साधक सच्चे हृदय से आपकी शरण में आता है, आप उसके जीवन के सभी कष्टों को मिटाकर उसे अखंड सौभाग्य, शांति और उत्तम फल प्रदान करती हैं।

अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: अरिकुल पद्म विनाशिनि (शत्रुओं और जीवन की बाधाओं को कमल के समान सहजता से नष्ट करने वाली / Destroyer of Obstacles), सेवक त्राता (अपने भक्तों की रक्षा करने वाली / Protector of Devotees), हरिहर गुण गाता (भगवान विष्णु और भगवान शिव भी जिनके पावन गुणों का गान करते हैं)।

सरल भावार्थ: हे जगज्जननी! आप अपने भक्तों के जीवन से भय, आंतरिक दुर्गुण और संकट रूपी शत्रुओं का सहज ही नाश कर देती हैं और सदा उनकी ढाल बनकर रक्षा करती हैं। आप ही इस चर-अचर जगत का जीवन आधार हैं, जिनकी असीम महिमा का गुणगान स्वयं त्रिदेव भी निरंतर श्रद्धापूर्वक करते हैं।

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: सिंह को वाहन साजे (शक्ति और निर्भयता के प्रतीक सिंह पर सवार / Riding a Lion), कुण्डल हैं साथा (कानों में सुंदर दिव्य कुंडल सुशोभित हैं), देव वधू जस गावत (स्वर्ग की देवियाँ माँ का यशोगान गाती हैं), नृत्य करत ताथा (आनंदित होकर ताल पर नृत्य करती हैं)।

सरल भावार्थ: सिंह पर सवार होकर माँ का यह तेजोमय रूप अत्यंत मनमोहक प्रतीत होता है और उनके कानों में झिलमिलाते कुंडल उनके मुख मंडल की आभा को और बढ़ा रहे हैं। माँ की कृपा और वात्सल्य देखकर स्वर्ग की देवियाँ भाव-विभोर होकर उनके यश के गीत गाती हैं और आनंद में मग्न होकर भक्ति भाव से नृत्य करती हैं।

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: सतयुग रूपशील (सत्य के युग में अत्यंत सुशील, पवित्र और सौम्य स्वरूप), नाम सती कहलाता (प्रजापति दक्ष की पुत्री देवी सती के रूप में विख्यात हुईं), हेमांचल घर जन्मी (पुनर्जन्म में गिरिराज हिमालय के घर पुत्री रूप में अवतार लिया), सखियन संग राता (अपनी सखियों के संग स्नेह और तप में मग्न रहीं)।

सरल भावार्थ: सतयुग में माँ ने सती के रूप में जन्म लेकर अपने अद्वितीय सतीत्व का परिचय दिया था। इसके पश्चात भगवान शिव को पुनः पति रूप में पाने के लिए पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती रूप में अवतार लिया और अपनी सखियों के संग जंगल में रहकर बालू के शिवलिंग की पूजा की, जो हरतालिका तीज का मूल आधार बनी।

शुम्भ-निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।
सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: शुम्भ-निशुम्भ विदारे (अहंकारी दैत्यों शुम्भ और निशुम्भ का वध किया / Defeated Demonic Forces), हेमांचल स्थाता (हिमालय की पावन भूमि पर विराजने वाली), सहस्त्र भुजा तनु धरि के (हजारों भुजाओं वाला विराट शरीर धारण करके), चक्र लियो हाथा (दुष्टों के विनाश हेतु हाथ में चक्र धारण किया)।

सरल भावार्थ: जब संसार में राक्षसी प्रवृत्तियों ने धर्म को नष्ट करने का प्रयास किया, तब हिमालय की कन्या माँ पार्वती ने अपनी सहस्र भुजाओं में चक्र और अस्त्र धारण कर शुम्भ-निशुम्भ का संहार किया। माँ का यह रूप सिखाता है कि आत्मसम्मान और धर्म की रक्षा के लिए अंतःकरण में अदम्य साहस और शक्ति का होना अनिवार्य है।

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: सृष्टि रूप तुही है जननी (संपूर्ण ब्रह्मांड को जन्म देने वाली प्रकृति व माता), शिवसंग रंगराता (भगवान शिव के साथ एकाकार व दिव्य प्रेम में लीन), नन्दी भृंगी बीन लही (शिवजी के गण नंदी और भृंगी द्वारा वीणा व वाद्य बजाना), मदमाता (अलौकिक आनंद और भक्ति में झूमता हुआ)।

सरल भावार्थ: आप ही इस अखिल ब्रह्मांड को जीवन देने वाली आद्या शक्ति हैं और महादेव के साथ आपका दांपत्य प्रेम सृष्टि का सर्वोच्च आदर्श है। कैलाश पर्वत पर जब नंदी और भृंगी जैसे गण वीणा की मधुर धुन छेड़ते हैं, तो उस दिव्य वातावरण को देखकर समस्त संसार आनंद और भक्ति रस में सराबोर हो जाता है।

देवन अरज करत हम चित को लाता।
गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: देवन अरज करत (समस्त देवता करबद्ध होकर प्रार्थना करते हैं), चित को लाता (मन को माता के चरणों में एकाग्र करके लगाना), गावत दे दे ताली (हाथों से ताली बजाकर तालबद्ध आरती गाना), मन में रंगराता (हृदय में ईश्वर का गहरा प्रेम और आनंद भर जाना)।

सरल भावार्थ: सभी देवता माँ के चरणों में विनती करते हैं और अपने मन को पूर्ण रूप से माँ के ध्यान में समर्पित कर देते हैं। तीज के व्रत में महिलाएँ भी अपने चित्त को एकाग्र करके ताली बजाते हुए मधुर स्वर में यह आरती गाती हैं, जिससे उनका मन सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर भक्ति के पावन रंग में रंग जाता है।

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

कठिन शब्दों व वाक्यांशों का अर्थ: श्री प्रताप आरती मैया की (यहाँ ‘श्री’ भगवती के लिए और ‘प्रताप’ उनके दिव्य तेज, प्रभाव व अलौकिक महिमा के लिए प्रयुक्त हुआ है / Divine Radiance & Power of the Goddess), सदासुखी नित रहता (सदा निरोगी, प्रसन्न और संतुष्ट रहना), सुख सम्पत्ति पाता (जीवन में समृद्धि और आत्मिक संतोष प्राप्त होना)।

सरल भावार्थ: यहाँ ‘श्री प्रताप’ (संभवतः रचयता का नाम या ) , भगवती के असीम तेज और अलौकिक प्रभाव का प्रतीक है। जो भी साधक या सुहागिन स्त्री माँ के इस पावन प्रताप (तेज) से परिपूर्ण आरती का श्रद्धापूर्वक गान करती है, उसके जीवन से दुख और दरिद्रता सदा के लिए दूर हो जाती है और उसके परिवार में अटूट सुख, शांति और अखंड समृद्धि का वास होता है।

दैनिक पूजा में आरती के साथ-साथ चालीसा पाठ का भी विशेष प्रभाव होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि चालीसा में ठीक 40 पंक्तियाँ ही क्यों होती हैं? इसका पौराणिक रहस्य जानने के लिए पढ़ें हमारा आलेख: चालीसा क्या है और इसमें 40 पंक्तियाँ ही क्यों होती हैं?।

हरतालिका तीज, हरियाली तीज और देवी पार्वती के पावन इतिहास के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप Wikipedia: Teej Festival & Traditions का अवलोकन कर सकते हैं।

तीज व्रत में आरती करने का सही और आसान तरीका (Step-by-Step Method)

  • दीपक का चयन: तीज की पूजा में गाय के शुद्ध घी का चौमुखी अथवा एकमुखी दीपक या शुद्ध भीमसेनी कपूर जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • पूजा दिशा: आरती करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • थाल घुमाने का शास्त्रीय नियम: थाल को माता की प्रतिमा के समक्ष ‘ॐ’ के आकार में क्लॉकवाइज (Clockwise) दिशा में घुमाएं—4 बार चरणों में, 2 बार नाभि में, 1 बार मुख मंडल पर और 7 बार पूरे शरीर पर।
  • शिव-पार्वती युगल आरती: तीज के दिन माँ पार्वती की आरती के तुरंत बाद भगवान शिव की आरती अवश्य करें।
  • आरती ग्रहण करना: आरती पूर्ण होने के बाद दोनों हथेलियों से ज्योति का ताप लें और अपने सिर व नेत्रों पर स्पर्श कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

1. क्या हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों में यही आरती गाई जाती है?

हाँ, तीज का कोई भी पर्व हो (हरियाली तीज, हरतालिका तीज या कजरी तीज), वह माँ पार्वती और शिवजी को ही समर्पित होता है। अतः तीज माता की पूजा के समापन पर माँ पार्वती की इसी पावन आरती का गान किया जाता है।

2. क्या आरती की अंतिम पंक्ति में ‘श्री प्रताप’ किसी कवि का नाम है?

अधिकांश विद्वानों और प्रामाणिक व्याख्याकारों के अनुसार यहाँ ‘श्री’ का अर्थ भगवती और ‘प्रताप’ का अर्थ उनका दिव्य तेज व प्रभाव (Divine Glory) है। कुछ मतों में इसे रचयिता की छाप भी माना जाता है, परंतु मूल भाव माँ के अलौकिक प्रताप की स्तुति ही है।

3. क्या कुंवारी कन्याएं तीज पर यह आरती कर सकती हैं?

बिल्कुल, हरतालिका तीज का व्रत अविवाहित कन्याएं भी मनवांछित, योग्य और संस्कारवान वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं और यह आरती पूरे भाव से गा सकती हैं।

🌸 क्या आपको तीज माता की यह आरती और इसका सरल अर्थ पसंद आया?

तीज के इस पावन पर्व पर अपनी बहनों, सखियों और परिजनों के साथ यह शुभ स्तुति अवश्य साझा करें।

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अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई आरतियों, मंत्रों और व्रत पूजन विधि का संकलन पारंपरिक मान्यताओं और प्रामाणिक धार्मिक संदर्भों के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक जानकारी और सनातन ज्ञान को सरल भाषा में साझा करना है।

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