Brihaspati Dev Chalisa: गुरुवार को चालीसा की प्रत्येक पंक्ति का असली अर्थ जानकर पढ़ें! (देवगुरु चालीसा भावार्थ)
॥ श्री बृहस्पति देव चालीसा: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ नवग्रहों में देवताओं के पूज्य गुरु और ज्ञान, बुद्धि,
॥ श्री बृहस्पति देव चालीसा: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ नवग्रहों में देवताओं के पूज्य गुरु और ज्ञान, बुद्धि,
॥ श्री खाटू श्याम जी की आरती: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ कलयुग के प्रत्यक्ष देव और ‘हारे का
॥ श्री शुक्र देव चालीसा: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ नवग्रहों में असुरों के परम ज्ञानी गुरु और भौतिक
॥ श्री शनिदेव जी की आरती: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ भगवान शनिदेव को नवग्रहों में न्यायधीश और कर्मफल
संक्षेप में: श्री हनुमान चालीसा 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 40 चौपाइयों और 3 दोहों का एक
संक्षेप में: चालीसा (Chalisa) का अर्थ 40 चौपाइयों में रचित भक्ति स्तुति है। इसकी शुरुआत 16वीं सदी में गोस्वामी तुलसीदास
श्री सूर्य देव चालीसा (Shri Surya Dev Chalisa) सूर्य चालीसा क्या है? श्री सूर्य देव चालीसा भगवान सूर्यदेव की महिमा,
शनि चालीसा क्या है? | What is Shani Chalisa? शनि चालीसा शनिदेव की स्तुति और भक्ति का एक प्रसिद्ध पाठ
॥ झूलेलाल जी की आरती ॥ ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा। पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ सरल भावार्थ: हे देवों के देव श्री गणेश