श्री शनि चालीसा (Shani Chalisa) | संपूर्ण पाठ और सरल भावार्थ

शनि चालीसा क्या है? | What is Shani Chalisa?

शनि चालीसा शनिदेव की स्तुति और भक्ति का एक प्रसिद्ध पाठ है। इसमें
शनिदेव के विभिन्न नाम, उनके स्वरूप, महिमा और उनसे जुड़े पौराणिक
प्रसंगों का वर्णन मिलता है। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ
करके शनिदेव का स्मरण करते हैं।

शनि देव को न्याय और कर्मफल से जुड़े देवता के रूप में माना जाता है।
इसलिए शनि चालीसा में केवल उनकी महिमा का वर्णन ही नहीं, बल्कि धैर्य,
अच्छे कर्म, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का भाव भी दिखाई देता है।

इस पोस्ट में आपको शनि चालीसा (Shani Chalisa) का
संपूर्ण पाठ दिया गया है। साथ ही प्रत्येक दोहे और चौपाई के नीचे
सरल भावार्थ दिया गया है, ताकि पुराने शब्दों का अर्थ
समझने के साथ-साथ उनमें छिपा भक्तिभाव भी आसानी से समझ सकें।

शनि चालीसा (Shani Chalisa)

शनिदेव की भक्ति, स्तुति और भक्तिभावपूर्ण भावार्थ सहित संपूर्ण पाठ

॥ दोहा ॥


जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

भावार्थ:
हे गणेश (गिरिजा यानी माता पार्वती के पुत्र), हे मंगल करण (मंगल और शुभता प्रदान करने वाले), हे कृपाल (दयालु प्रभु), आप करुणा के सागर हैं। हे नाथ (स्वामी और पालन करने वाले प्रभु), दीन-दुखियों के दुःख दूर करके उन्हें सुख और संतोष प्रदान करें। हमारी भी प्रार्थना स्वीकार करें और अपने आशीर्वाद से जीवन को मंगलमय बनाएं।


जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

भावार्थ:
हे शनिदेव प्रभु, हे महाराज, आपकी जय हो। हमारी विनय (विनम्र प्रार्थना) सुनिए। हे रवि तनय (सूर्यदेव के पुत्र), हम आपकी शरण में हैं। अपनी कृपा-दृष्टि हम पर बनाए रखिए, हमारी लाज (मान-सम्मान और मर्यादा) रखिए और हमें धर्म तथा अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान कीजिए।

॥ चौपाई ॥


जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

भावार्थ:
हे शनिदेव दयाला (दयालु प्रभु), आपकी जय हो, आपकी जय हो। आप सदा भक्तन प्रतिपाला (अपने भक्तों का पालन और रक्षा करने वाले) हैं। हे महाराज, हम पर भी अपनी कृपा बनाए रखिए, हमारे मन को सद्बुद्धि दीजिए और हमें सत्य, धर्म तथा अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलाते रहिए।


चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥

भावार्थ:
हे चारि भुजा (चार भुजाओं वाले), श्याम स्वरूप में विराजमान शनिदेव महाराज, आपके मस्तक पर रत्नों से सुशोभित मुकुट आपकी दिव्य छवि को और भी मनोहर बनाता है। प्रभु, आपके इस तेजस्वी स्वरूप को हमारा नमन है। हमारे हृदय में भी आपकी भक्ति और श्रद्धा का प्रकाश बनाए रखिए।


परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

भावार्थ:
हे परम विशाल और मनोहर स्वरूप वाले शनिदेव महाराज, आपकी गंभीर दृष्टि और विकराल भृकुटि आपके शक्तिशाली एवं न्यायकारी स्वरूप को प्रकट करती है। प्रभु, हमें अपने कर्मों का विवेक दीजिए और अन्याय तथा अधर्म से दूर रखिए।


कुण्डल श्रवन चमाचम चमके।
हिये माल मुक्तन मणि दमकै॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपके श्रवण (कानों) में चमकते कुण्डल और हृदय पर सुशोभित मुक्तन मणि (मोती और रत्नों) की माला आपके दिव्य स्वरूप की शोभा बढ़ाती है। प्रभु, आपके इस पावन स्वरूप को नमन है। हमारे हृदय को भी भक्ति, शांति और सद्भाव से भर दीजिए।


कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपके हाथों में गदा, त्रिशूल और कुठार जैसे दिव्य आयुध सुशोभित हैं। आप अरिहिं संहारा (अधर्म और अन्याय का नाश करने वाले) प्रभु हैं। हमारे भीतर के अहंकार, भय, क्रोध और बुरे विचारों का भी नाश कीजिए और हमें सत्य के मार्ग पर दृढ़ रखिए।


पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन॥

भावार्थ:
हे पिंगल (शनिदेव का एक नाम), हे कृष्ण (श्याम स्वरूप वाले प्रभु), हे छाया नन्दन (छाया देवी के पुत्र), हे कोणस्थ, हे रौद्र और हे दुःख भंजन (दुःखों को दूर करने वाले प्रभु), आपके ये पावन नाम आपकी महान शक्ति और दिव्य स्वरूपों की महिमा बताते हैं। हे दुःख भंजन महाराज, हमारे दुःख और संकट दूर कीजिए तथा हमें धैर्य, सद्बुद्धि और सही मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए।


सौरी, मन्द शनी दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

भावार्थ:
हे सौरी (शनिदेव का एक प्रचलित नाम), हे मन्द (मंद गति से चलने वाले शनिदेव का नाम), हे शनि महाराज, हे भानु पुत्र (सूर्यदेव के पुत्र), आपके इन पावन नामों का स्मरण भक्त श्रद्धा और विश्वास से करते हैं। हे महाराज, अपनी कृपा से भक्तों की उचित मनोकामनाएँ पूर्ण करें और उनके जीवन में सुख, शांति एवं मंगल बनाए रखें।


जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं।
रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥

भावार्थ:
हे प्रभु, जिस भक्त पर आपकी कृपा हो जाती है, उसके जीवन की परिस्थितियाँ बदल सकती हैं। आप रंकहुं राव (साधारण व्यक्ति को भी सम्मान और समृद्धि देने वाले) महाराज हैं। प्रभु, हम पर भी अपनी कृपा बनाए रखें और हमें मेहनत, सद्कर्म तथा धर्म के मार्ग से आगे बढ़ने की शक्ति दें।


पर्वतहू तृण होइ निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपकी शक्ति अपरंपार है। आपके न्याय और कर्मफल के सामने पर्वत समान बड़ी चीज भी तिनके जैसी और तिनका भी पर्वत समान हो सकता है। प्रभु, हमें अपने कर्मों का महत्व समझने की बुद्धि दीजिए और अहंकार से सदैव दूर रखिए।


राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, श्रीराम के जीवन में भी ऐसी परिस्थितियाँ आईं जब राजपाट छोड़कर वन का मार्ग अपनाना पड़ा। प्रभु, जीवन की परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, हमें धर्म और कर्तव्य से विचलित न होने दें। विपरीत समय में धैर्य और विश्वास बनाए रखने की शक्ति प्रदान करें।


वनहुं में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, जीवन में छल और कपट किस प्रकार संकट का कारण बन सकते हैं, यह प्रसंग हमें सावधान करता है। प्रभु, हमें छल-कपट पहचानने की बुद्धि दीजिए और कठिन समय में धर्म, विवेक और विश्वास से विचलित न होने दें।


लषणहिं शक्ति विकल करिडारा।
मचिगा दल में हाहाकारा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, जब जीवन में अचानक बड़ा संकट आ जाए और मनुष्य स्वयं को असहाय अनुभव करे, तब धैर्य ही उसका सहारा बनता है। प्रभु, कठिन समय में हमें साहस दीजिए, संकट से निकलने की शक्ति दीजिए और हमारे मन को विचलित होने से बचाइए।


रावण की गति-मति बौराई।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, अहंकार जब बुद्धि पर हावी हो जाता है तो मनुष्य सही और गलत का विवेक खो बैठता है। प्रभु, हमें अहंकार और अधर्म से बचाइए, सद्बुद्धि प्रदान कीजिए और हमेशा सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दीजिए।


दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग बीर की डंका॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, सोने की लंका जैसी महान संपत्ति भी अहंकार और अधर्म के सामने टिक नहीं सकी। प्रभु, हमें धन, शक्ति और वैभव का अहंकार न हो। इन सबका सदुपयोग धर्म, सेवा और अच्छे कार्यों में करने की बुद्धि प्रदान करें।


नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, राजा विक्रमादित्य जैसे महान राजा के जीवन में भी कठिन समय आया। प्रभु, आपकी महिमा हमें यह स्मरण कराती है कि समय और परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। हमें सुख में अहंकार न करने और विपत्ति में धैर्य न खोने का आशीर्वाद दीजिए।


हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, विपरीत समय में मनुष्य को ऐसी कठिन परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ सकता है जिसकी उसने कल्पना नहीं की होती। प्रभु, संकट के समय हमारा धैर्य बनाए रखें, हमारी रक्षा करें और हमें सही मार्ग से विचलित न होने दें।


भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलहिं घर कोल्हू चलवायो॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, कठिन समय में बड़े से बड़ा व्यक्ति भी साधारण परिस्थितियों में जीवन बिताने को विवश हो सकता है। प्रभु, विपत्ति के समय हमें धैर्य दीजिए, अहंकार से दूर रखिए और कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति प्रदान कीजिए।


विनय राग दीपक महँ कीन्हयों।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

भावार्थ:
हे प्रभु, जब भक्त विनय और श्रद्धा से आपका स्मरण करता है, तब उसकी प्रार्थना आपके चरणों तक पहुँचती है। हे शनिदेव महाराज, हमारी भी विनय स्वीकार करें, हमारे मन का भय और चिंता दूर करें तथा जीवन में सुख, शांति और संतोष प्रदान करें।


हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, राजा हरिश्चन्द्र जैसे सत्यनिष्ठ राजा को भी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। प्रभु, विपत्ति चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हमें सत्य और धर्म का साथ कभी न छोड़ने दें। कठिन समय में हमारे विश्वास और मनोबल को मजबूत बनाए रखें।


तैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, राजा नल के जीवन में भी कठिन समय आया। प्रभु, आपकी महिमा हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ सदा एक जैसी नहीं रहतीं। सुख के समय हमें विनम्र और कठिन समय में धैर्यवान बनाए रखें।


श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
पारवती को सती कराई॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, इस पौराणिक प्रसंग में आपकी दृष्टि और प्रभाव की महिमा का वर्णन किया गया है। प्रभु, आपकी शक्ति को समझने की बुद्धि दें और हमें अपने कर्मों के प्रति सदैव सजग रखें। हमारी भक्ति स्वीकार करें और हम पर अपनी कृपा बनाए रखें।


तनिक विकलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपकी दृष्टि से जुड़ी इस पौराणिक कथा में आपकी शक्ति और प्रभाव का वर्णन मिलता है। प्रभु, हम पर अपनी कृपा-दृष्टि बनाए रखें, हमारे जीवन के संकटों को दूर करें और हमें सदैव विवेक तथा संयम के साथ जीवन जीने की शक्ति दें।


पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
बची द्रोपदी होति उधारी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, पांडवों के जीवन में भी कठिन समय आया। प्रभु, विपत्ति के समय धर्म और धैर्य का साथ ही मनुष्य को संभालता है। हमें भी कठिन परिस्थितियों में साहस दीजिए और सत्य तथा धर्म से कभी विचलित न होने दें।


कौरव के भी गति मति मारयो।
युद्ध महाभारत करि डारयो॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, कौरवों के अहंकार और गलत निर्णय उन्हें विनाश की ओर ले गए। प्रभु, हमें अहंकार, अन्याय और गलत संगति से बचाइए तथा सही निर्णय लेने की बुद्धि प्रदान कीजिए।


रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
लेकर कूदि परयो पाताला॥

भावार्थ:
हे रवि तनय (सूर्यदेव के पुत्र) शनिदेव महाराज, इस पौराणिक प्रसंग में आपके तेज और प्रभाव का वर्णन किया गया है। प्रभु, आपकी महिमा अपरंपार है। हमें भी अपनी भक्ति में स्थिर रखें और जीवन के कर्तव्य-पथ पर अडिग रहने का आशीर्वाद दें।


शेष देव-लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, देवताओं ने विनम्र होकर प्रार्थना की और सूर्यदेव को उस स्थिति से मुक्त कराया। प्रभु, हमारी छोटी-सी विनती भी स्वीकार करें। जीवन में जब भी कोई संकट आए, हमें उससे निकलने का साहस और सही मार्ग प्रदान करें।


वाहन प्रभु के सात सुजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

भावार्थ:
हे शनिदेव प्रभु, आपके विभिन्न वाहनों का वर्णन आपकी दिव्य महिमा और ज्योतिषीय परंपराओं से जुड़ा है। महाराज, आपके प्रत्येक स्वरूप में कोई न कोई संकेत और शिक्षा छिपी मानी जाती है। हमें उस शिक्षा को समझने और अपने कर्मों को सही दिशा देने की बुद्धि प्रदान करें।


जम्बुक सिह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपके विभिन्न वाहनों को ज्योतिषीय परंपरा में अलग-अलग फल और संकेतों से जोड़ा गया है। प्रभु, इन मान्यताओं के साथ हमें यह भी समझने की बुद्धि दें कि हमारे कर्म ही हमारे जीवन की दिशा को आकार देते हैं।


गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपके शुभ वाहनों से जुड़े वर्णन में सुख और समृद्धि की कामना दिखाई देती है। प्रभु, हमारे घर-परिवार में भी सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखें तथा हमें धन-संपत्ति का सदुपयोग करने की बुद्धि दें।


गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिह सिद्ध्कर राज समाजा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपके वाहनों से जुड़े विभिन्न फल ज्योतिषीय परंपरा में बताए गए हैं। प्रभु, हर परिस्थिति में हमें संयम और विवेक दीजिए, नुकसान से बचाइए और जीवन में सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान कीजिए।


जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, इन पंक्तियों में विभिन्न वाहनों से जुड़े पारंपरिक ज्योतिषीय संकेत बताए गए हैं। प्रभु, हमें भ्रम, भय और गलत निर्णयों से बचाइए तथा विपरीत समय में विवेक, धैर्य और आत्मबल बनाए रखने की शक्ति दीजिए।


जब आवहिं स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, स्वान सवारी से जुड़े इस पारंपरिक संकेत में चोरी आदि से सावधान रहने की बात कही गई है। प्रभु, हमारे घर-परिवार, धन-संपत्ति और प्रियजनों की रक्षा करें तथा हमें हर प्रकार के भय और संकट से सुरक्षित रखें।


तैसहि चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपकी दशा से जुड़े चार चरण—स्वर्ण, लौह, चाँदी और तांबा—ज्योतिषीय परंपरा में अलग-अलग फल के संकेत माने गए हैं। प्रभु, समय चाहे जैसा हो, हमें धैर्य, सद्कर्म और आपकी भक्ति से कभी विचलित न होने दें।


लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

भावार्थ:
हे शनिदेव प्रभु, लौह चरण से जुड़ी मान्यता कठिन समय और चुनौतियों का संकेत देती है। महाराज, ऐसे समय में हमारे धन, परिवार और जीवन की रक्षा करें तथा विपत्ति का सामना करने के लिए हमें धैर्य, साहस और विवेक प्रदान करें।


समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, ताम्र और रजत चरणों को शुभकारी तथा स्वर्ण चरण को सर्वसुख और मंगल प्रदान करने वाला माना गया है। प्रभु, हमारे जीवन में भी शुभता, सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश बनाए रखें।


जो यह शनि चरित्र नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, जो भक्त श्रद्धा से आपके इस पावन चरित्र का नित्य स्मरण और पाठ करता है, उसके मन में आपके प्रति विश्वास और धैर्य बना रहता है। प्रभु, हमें भी अपनी भक्ति में स्थिर रखें और कठिन समय में हमारा मनोबल बनाए रखें।


अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

भावार्थ:
हे अद्भुत नाथ (अद्भुत स्वरूप वाले प्रभु), आपकी लीलाएँ और आपकी महिमा अपरंपार हैं। हे शनिदेव महाराज, हमारे शत्रुओं और बाधाओं की शक्ति को कमजोर करें, हमारे मन से भय दूर करें और हमें सत्य तथा न्याय के मार्ग पर चलने का साहस दें।


जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, आपकी पूजा और ग्रह शांति के लिए योग्य विद्वान से विधिपूर्वक पूजा कराने की परंपरा रही है। प्रभु, हमारी श्रद्धा स्वीकार करें और हमारे जीवन में शांति, सद्बुद्धि, संयम तथा मंगल बनाए रखें।


पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत॥

भावार्थ:
हे शनिदेव महाराज, शनिवार के दिन पीपल को जल अर्पित करने और दीपदान करने की धार्मिक परंपरा आपके प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव प्रकट करती है। प्रभु, हमारी भक्ति स्वीकार करें और हमारे जीवन में सुख, शांति, सद्भाव और प्रकाश बनाए रखें।


कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

भावार्थ:
हे शनिदेव प्रभु, आपके दास रामसुंदर आपकी महिमा का गान करते हुए कहते हैं कि आपका स्मरण जीवन में सुख और प्रकाश का अनुभव कराता है। हे महाराज, हमारे मन के अंधकार को दूर करें, हमें सद्बुद्धि दें और अपने चरणों की भक्ति में सदैव बनाए रखें।

॥ दोहा ॥


पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

भावार्थ:
हे शनिश्चर देव महाराज, जो भक्त श्रद्धा, विश्वास और शुद्ध भाव से आपका पाठ करता है, उसके मन में धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है। प्रभु, हमें भी आपकी भक्ति में स्थिर रखें, हमारे भय और चिंता को दूर करें तथा जीवन की कठिनाइयों को पार करने का साहस और सद्बुद्धि प्रदान करें।

॥ इति श्री शनि चालीसा ॥

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